Sunday, 20 August 2017

बिहार क्या राजनीती -नितीश के साथ साथ जनता के भी दोनों हाथों में लड्डू

बिहार क्या राजनीती -नितीश के साथ साथ जनता के भी दोनों हाथों में लड्डू
कुछ दिनों से बिहार की राजनीती का रोमांच अपने चरम पर था।लुका छुपी का खेल लगातार चल रहा था।नितीश कभी रूठे कभी माने। कभी गठबंधन में सब ठीक । कभी उठा पटक। इन सबके बाद आखिरकार नितीश ने इस्तीफा देकर ।दुबारा सरकार बनाने में जरा देर नही लगाई। जनता की मौज अब जब बीजेपी के साथ नीतीश बाबू मुख्यमंत्री है।तो एक सवाल यह है। कि चुनाव के दौरान महागठबंधन और बीजेपी दोनों के अलग अलग घोषणापत्र थे। नीतीश ने पिछले पौने दो सालो में महागठबंधन के वादों पर काम किया।व् शराब बंदी जैसी योजना लागू की।

अब जनता इस इंतज़ार में है।कि अब अगले 3 सालो  वो बीजेपी का घोषणा पत्र लागू करेंगे। इस प्रकार जनता को दोनों घोषणापत्रों के वादों का लाभ जनता को मिलना चाहिए।क्योंकि नीतीश अपना घोषणापत् लागू करे ।साथ ही साथ बीजेपी का भी। अगर नितीश ने ये कर दिखया तो ।इतिहास में पहली बार होगा। और जनता की पौ बारह होना तय है।

गुजरात में कांग्रेस ने चखा जीत का स्वाद

कल रात भर चले शियाशी ड्रामे के बीच जब गुजरात की तीन राज्यसभा की सीटों के नतीजे देर रात आये तो को कांग्रेस पार्टी के लिए बड़ी राहत लेकर आये । पिछले एक महीने से चला आ रहा राजनैतिक संकट फ़िलहाल तो कांग्रेस पार्टी के टल गया । कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल अपनी राज्यसभा की सीट बचाने में कामयाब रहे । दो कांग्रेस के विधायकों का वोट रद्द होने का फायदा अहमद पटेल को मिला और वो 44 मतों एक साथ विजयी घोसित कर दिए गए । गौरतलब है की कांग्रेस के दो विधायक भोला भाई और राघव जी भाई पटेल ने वोट डालते वक़्त अपना वोट वहां पर मोजूद बीजेपी के पोलिंग एजेंट को दिखाया । जिसपर कांग्रेस के नेताओ ने आपत्ति जताई ।और कांग्रेस के कई नेताओ ने चुनाव आयोग से इस मामले के जांच की मांग की,और वहां की सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद चुनाव आयोग कांग्रेस के इन दोनों विधायकोंकेवोट को रद्द करार दिया । जिसका फायदा अहमद पटेल को मिला । पटेल ने कांग्रेस से बागी होकर बीजेपी में शामिल हुए बलवंत सिंह को मात दी । चुनाव आयोग के बयान के अनुसार विडियो देखने से साफ पता चलता है कि कांग्रेस के दोनों बागी विधायकों ने अपने वोट को गुप्त नहीं रखा और इसके साथ उन्होंने बने नियम का उल्लंघन किया । वही इस जीत के बाद अहमद पटेल ने इसे सत्य की जीत करार दिया जिसके सामने बाहुबल और पैसा हर गया । दूसरी तरफ बीजेपी के अमित शाह और स्मृति ईरानी नेभी अपनी सीट बड़ी आसानी से जीत ली ।

हैरी मैट सेजल का फ्लॉप शो और शाहरुख़ खान

पिछले कई सालो से लगातार शारुख खान की फिल्मो का ग्राफ गिरता ही जा रहा है । हाल ही में आई फिल्म हैरी मैट सेजल ने ये बात और पुख्ता कर दी कि शाहरुख़ खान में वो बात नहीं रही जो कभी दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे से शुरू हुई थी । शाहरुख़ का वो रोमांटिक अंदाज़ आज तक लोगो के दिल में बसा हुआ । जब शाहरुख़-काजोल को ट्रैन में से एक हाथ देते हुए काजोल को पकड़ते है । वो शाहरुख़ का दिलकस छोटे छोटे शहरो में बड़ी बड़ी बात होती रहती है कहना,अब सब ख़त्म सा होता जा रहा है । वो कुछ कुछ होता है में शाहरुख़ का राहुल बनकर अंजलि को छेड़ना ,कभी खुशी कभी गम में बड़ी भाई और अपने माँ का लाडला होना ।

ऐसी कहानी जो लोगो केदिलो दिमाग में अब तक छाई हुई है । वो बात शाहरुख़ खान में अब कही नहीं दिखती । हर नहीं फिल्म के साथ उनकी फैन फोल्लोविंग काम होती जा रही है शायद इस कारण उनकी पिछली कुछ फिल्मे है जो शायद उन्हें नहीं करनी चाहिए थी ,पर उन्होंने कि चाहे वो फराह खान कि हैप्पी न्यू ईयर हो या रोहित शेट्टी कि चेन्नई एक्सप्रेस ,फिर उसके बाद आयी फैन इन तमाम फिल्मो से दर्शक निराश ही हुए । शाहरुख़ कि बढ़ती उम्र भी इसका एक कारण हो सकती है । पर अब वक़्त आ गया है कि शाहरुख़ को भी अपनी नयी पारी के बारे में सोचना पड़ेगा कि वो अब और फिल्मे बतौर अभिनेता बनाएंगे या फिर निर्माता के तोर पर ।

Thursday, 18 August 2016

रक्षाबन्धन का रहस्य

रक्षाबंधन नहीं - श्रावण पूर्णिमा : अंगुलिमाल धम्मदीक्षा व प्रथम बौद्ध संगीति शुभारंभ दिवस

रक्षाबंधन का दिन सावन (श्रावण) की पूर्णिमा, यह वही दिन है जिस दिन भगवान बुद्ध ने खूँखार डाकू अंगुलिमाल को धम्मदीक्षा दिया था। इसी दिन बौद्ध भिक्खुओं ने प्रथम बौद्ध संगीति का शुभारंभ किया था। भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण वैशाख की पूर्णिमा के बाद तीसरे महीने की पूर्णिमा को यानि श्रावण की पूर्णिमा को बौद्ध संगीति शुरू हुई। इसका ऐतिहासिक और लिखित महत्व होने के कारण, इसको मिटाने के उद्देश्य से आर्यों ने इसी दिन को यानि सावन पूर्णिमा के दिन ही यह रक्षाबंधन स्थापित कर दिया। जिसका परिणाम यह हुआ कि हम बौद्ध संगीति के प्रथम दिन को भी भूल गए और उसके महत्व को भी नहीं समझ सके।

आर्यों ने बड़ी ही होशियारी से एक तीर से दो लक्ष्य साधे :-
एक तो राजा बलि की हत्या करके उस पर पर्दा डाल दिया। दूसरे अपनी उसी जीत की खुशी को सावन पूर्णिमा के दिन स्थापित करके बौद्धों के एक ऐतिहासिक दिन और धम्म सभा आयोजन की परम्परा को भी मिटा दिया। और रक्षाबंधन का त्यौहार बना दिया।

किन्तु यह रक्षाबंधन भाई -बहन का त्यौहार कैसे बना यह समझ में नहीं आता। यद्यपि आर्यों ने मूलनिवासियों की संस्कृति को नष्ट कर इन्हें अपमानित करने के लिए बहुत बड़े पैमाने पर अभियान चलाया। इसी के परिणाम स्वरूप हिंदू धर्म की अधिकतर पुराण और स्मृतियाँ सामने आई।

जो हिंदू धर्म की मान्यताओं पर रक्षाबंधन मनाने वाले लोग हैं उनको ज्ञात होना चाहिए कि जिस तथ्य के आधार पर रक्षाबंधन मनाया जाता है वह तथ्य आज के रक्षाबंधन से मेल नहीं खाता। रक्षा तो इन्द्राणी ने इन्द्र को बांधा था जोकि इन्द्र की पत्नी थी किन्तु अब बहन रक्षा बांधती है। आखिर बहन क्यों बांधती हैं ? क्या बहन को पत्नी का दर्जा देना उचित है ? यदि नहीं, तो क्या पत्नी को वर्ष में एक बार बहन बनाना उचित है ? नहीं। जबकि हिंदू तथ्य के अनुसार रक्षाबंधन तो पत्नी से ही बंधवाया जाना उचित है जैसा इन्द्र ने इन्द्राणी से बंधवाया था। किन्तु आज का हर हिंदू अपनी बहन से राखी बंधवाता है अर्थात वर्ष में एक दिन बहन को बड़ी खुशी से पत्नी का दर्जा दे दिया जाता है। बहन का इससे बड़ा अपमान और क्या हो सकता है ? अब आप राखी किससे बंधवायेगे, फैसला आप पर है।

इस देश के मूलनिवासियों को ध्यान रखना होगा कि आपके मूल त्यौहार को तो त्यौहार बनने से पहले ही दफना दिया गया। प्रथम बौद्ध संगीति और अंगुलिमाल धम्मदीक्षा का वह दिन आपकी यादाश्त से मिटा दिया गया। इस देश के मूलनिवासी महाशक्तिशाली, दानवीर सम्राट बलि को छलपूर्वक परास्त करके मूलनिवासियों की
पराजय घोषित की गयी। यही रक्षाबंधन की सच्चाई है।

यह भाई -बहनों का त्यौहार नहीं है। यदि ऐसा होता तो मुसलमान बहनें, ईसाई बहनें एवं अन्य धर्मो की बहनें अपने -अपने भाइयों को राखियां बांधती होती, लेकिन ऐसा नहीं होता है। दूसरा इस त्यौहार का रहस्य यह है कि यह त्योहार आर्य और अनार्य संघर्ष एवं अनार्य दमन की यादगार है। यह त्यौहार स्त्री दासता का प्रतीक है। स्त्री को अबला कहकर इसकी रक्षा का भार पुरूष पर डाला गया है। अपनी रक्षा की राखी बांधकर स्त्री सदैव दूसरों की आश्रित और अपने को हीन समझती रहे यह भी इस त्यौहार का उद्देश्य है।

इसलिए रक्षाबंधन मूलनिवासी बौद्धों का त्यौहार नहीं हो सकता। मूलनिवासियों के धर्म और संस्कृति में महिलाओं का पुरूषों के बराबर सम्मान और अधिकार है। अपनी मान मर्यादा को बनाए रखना, अपनी बहन बेटियों की रक्षा -सुरक्षा और सहयता करना तो हमारा मानवीय और नैतिक कर्तव्य है जोकि बिना राखी बंधवाए
ही करना चाहिए और करते भी हैं। ब्राह्मण के द्वारा बांधे जाने वाले कलावे (धागे) को कभी नहीं बंधवाना चाहिए, क्योंकि यह हमारी गुलामी का प्रतीक है और कोई भी ढोंग पाखंड करने की जरूरत नहीं है। अपने इतिहास से सीख लें।

हर पूर्णिमा को बौद्ध उपासक / उपासिकाओं को शुभ वस्त्र पहनकर अपने बच्चों के साथ, परिवार के सभी लोगों के साथ अपने नजदीक के चैत्यों, बुद्ध विहारों, स्तूपों पर धम्म वन्दना के लिए जाना चाहिए। जिससे कि हमारे पूर्वजों के प्राचीन काल के कल्चर की शुरुआत दुबारा से हो सके, और जिसके घर के नजदीक कोई चैत्य, बुद्ध विहार, स्तूप मौजूद नहीं है, वो अपने घर को ही बुद्धमय बनाकर परिवार के साथ धम्म वन्दना करे।

किसी भी धम्म स्थल, सामूहिक भूमि, संभव हो सके तो व्यक्तिगत भूमि पर उचित स्थान पर प्रत्येक वर्ष सावन पूर्णिमा के दिन एक बोधिवृक्ष लगाएं। प्रथम बौद्ध संगीति को स्मरणीय बनाने के लिए धम्म संगोष्ठियों का आयोजन करें। अपने आचरण -सभ्यता -संस्कृति और धम्म के प्रति सचेत रहें।

अत्त दीपो भव भवतु सब्ब मंगलं
सम्राट अशोक धम्म विजय दिवस महोत्सव व बौद्ध धम्मदीक्षा
11 अक्टूबर 2016, सारनाथ, वाराणसी, उत्तर प्रदेश

अंगुलिमाल धम्म दीक्षा व प्रथम बौद्ध संगीति शुभारंभ दिवस की
हार्दिक धम्मकामनाएँ, नमो बुद्धाय....

Monday, 1 August 2016

500 रु.में बनेगा इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस, दुनिया में कहीं भी चला सकेंगे कार

अब आप इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस बनवा सकते हैं। जिसका सीधा-सा मतलब है कि उसे बनवाकर दुनिया के किसी भी कोने में कार, बाइक से लेकर पर्सनल यूज के लिए कोई भी गाड़ी चला सकते हैं। इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस बनावाना भी न केवल आसान है, बल्कि उसका खर्च भी बहुत कम आता है। आज हम आपको मात्र 500 रुपए में इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के तरीके बता रहा है। जिसके लिए आपको इन बातों का ध्यान रखना होगा...

इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस न केवल रेग्युलर विदेश यात्रा करने वालों के काम आता है, बल्कि जो कभी-कभार विदेश जाते हैं, उन्हें भी इसका फायदा मिलता है। इसके साथ ही जो लोग विदेश कंपनियों के तरफ काम के लिए कॉन्ट्रैक्ट पर जाते हैं, उनके लिए भी यह काफी लाभकरी होता है। यह किसी भी इमरजेंसी आपके लिए विदेश में काम आ सकता है। साथ ही, विदेश में घूमने का खर्च भी कम करता है।

कैसे करें अप्लाई
इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस को आप जैसे सामान्य लाइसेंस बनवाते हैं, उसी तरह बनवा सकते हैं। इसके लिए आप लोकल आरटीओ ऑफिस में जाकर अप्लाई कर सकते हैं।

चाहिए ये डॉक्युमेंट ...
इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए इन डॉक्युमेंट की जरूरत होती है। इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस बनवाते समय आपको इन डॉक्युमेंट्स के ऑरिजनल भी अपने साथ रखने होंगे।

फॉर्म 4A (इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस का एप्लिकेशन फॉर्म), ये ऑफिस और ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
- वैलिड ड्राइविंग लाइसेंस की अटेस्टेड कॉपी ...
- एड्रेस प्रूफ की अटेस्टेड कॉपी ...
- वैलिड पासपोर्ट की अटेस्टेड कॉपी ...
- वैलिड वीजा की अटेस्टेड कॉपी ...
- एयर टिकट की कॉपी ...
- पांच पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ ...
- मेडिकल फॉर्म 1-A, ये ऑफिस और ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर उपलब्ध है। ...
- भारतीय राष्ट्रीयता का प्रूफ ...
- बर्थ सर्टिफिकेट की अटेस्टेड कॉपी ...

ये है फीस ...
- इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए 500 रुपए फीस देनी होगी। ये आपको अपने एरिया के लोकल ट्रांसपोर्ट ऑफिस को कैश में जमा करानी होगी। ...

कितने समय के लिए होता है जारी ...
इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस एक साल के लिए जारी होता है। आपको एक साल के टाइम पीरियड में इसका इस्तेमाल करना होगा। नॉर्मल ड्राइविंग लाइसेंस अब पांच साल के लिए बनता...

कौन बनवा सकता है लाइसेंस ...
- आपके पास वैलिड ड्राइविंग लाइसेंस होना चाहिए। ...
- आपके पास वैलिड पासपोर्ट होना चाहिए। ...


नहीं होता है रिन्युअल ...
इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यू नहीं होता। वैलिडिटी खत्म होने के बाद आपको फिर से इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अप्लाई करना होगा। ...


कब होता है जारी ...
इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस सुबह 8.30 बजे से दोपहर के 1:00 बजे तक जारी होता है। ...


कितने दिन में मिलता है इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस ...
इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस सात वर्किंग दिन से अधिकतम 30 दिन में जारी हो जाता है। ...


Source: http://money.bhaskar.com/news-fbo/MON-STA-DELH-with-international-driving-licence-drive-anywhere-in-world-5193375-PHO.html

Sunday, 10 July 2016

ये 15 बातें पढ़ने में छोटी ज़रूर हैं, लेकिन आपकी ज़िंदगी पर डाल सकती हैं बड़ा असर

कई बार हम लोग छोटी-छोटी दिक्कतों के लिए भी दवाओं का सहारा लेते हैं, जबकि कुछ ऐसे उपाय हैं, जिन्हें अपनाकर ऐसी परेशानियों को छू-मंतर किया जा सकता है। आजकल की लाइफस्टाइल ऐसी है कि हमारे पास खुद की देखभाल का वक़्त नहीं बचता है, तो हमने सोचा क्यों न आपको ऐसे आइडियाज़ बताएं, जिन्हें आप आसानी से फॉलो कर सकते हैं। आपको भले इन पर यकीन नहीं होगा, लेकिन एक बार आजमाकर देखिए, फिर हमसे बताइए।

1. बिलकुल ठण्डे पानी से नहाइए, मुँहासे (Acne) की समस्या नहीं होगी। क्योंकि ये त्वचा के खुले बड़े छिद्रों (Pores) को बंद कर देता है।



2. अगर रात में सोते हुए नाक बंद हो जाती है, तो अपने पास एक प्याज रखिए।



3. अगर माइग्रेन की प्रॉब्लम है तो हाथों को बर्फ के पानी में रखिए और उन्हें घुमाइए तो आराम मिलेगा।



4. अगर हंसी नहीं रुक रही, तो खुद को पिंच करिए, हंसी रुक जाएगी।



5. अगर मच्छर ने काट लिया है, तो उस जगह पर Deo लगाइए, खुजली नहीं होगी।



6. दांत में दर्द होने पर अपनी अंगूठे और तर्जनी उंगली के बीच बर्फ रखकर दबाने से दर्द में 50 प्रतिशत राहत मिलती है।



7. अगर आप लेटे हुए हैं और चक्कर आ रहा है तो अपना एक पैर फर्श पर रखिए, दिमाग को इससे मदद मिलती है।



8. नींद आने में समस्या हो रही है, तो आंखों को एक मिनट तक तेजी से झपकाने से नींद आएगी।



9. सोने से पहले अगर आप किसी स्पीच या नोट को याद करते हैं, तो सुबह ये आपको याद अच्छी तरह से याद रहेगी।



10. अगर आपको नींद आ रही है, तो अपनी सांसों को जितना देर हो सके रोककर रखिए, फिर छोड़ दीजिए, नींद नहीं आएगी।



11. अगर गले में खराश है, तो अपने कानों को खींचिए, आराम मिलेगा।



12. काम करते समय अगर ध्यान भटक रहा है, तो खुद से बातचीत करने पर ध्यान भटकना कम होता है।



13. 30 से 35 मिनट की पढ़ाई के बाद 10 मिनट का ब्रेक लेने से पढ़ा हुआ याद रहता है।



14. मानसिक दबाव महसूस करने पर हंसना चाहिए। इससे 50 प्रतिशत तक मानसिक दवाब कम होता है।



15. अवसाद में आने पर आप जिनसे प्यार करते हैं, उनके बगल सोइए, नींद गहरी और अच्छी आएगी, अवसाद कम होगा।


Wednesday, 29 June 2016

औरत का सफर

बाबुल का घर छोड़ कर पिया के घर आती है..
एक लड़की जब शादी कर औरत बन जाती है..
अपनों से नाता तोड़कर किसी गैर को अपनाती है..
अपनी ख्वाहिशों को जलाकर किसी और के सपने सजाती है..
सुबह सवेरे जागकर सबके लिए चाय बनाती है..
नहा धोकर फिर सबके लिए नाश्ता बनाती है..
पति को विदा कर बच्चों का टिफिन सजाती है..
झाडू पोछा निपटा कर कपड़ों पर जुट जाती है..
पता ही नही चलता कब सुबह से दोपहर हो जाती है..
फिर से सबका खाना बनाने किचन में जुट जाती है..
सास ससुर को खाना परोस स्कूल से बच्चों को लाती है..
बच्चों संग हंसते हंसते खाना खाती और खिलाती है..
फिर बच्चों को टयूशन छोड़,थैला थाम बाजार जाती है..
घर के अनगिनत काम कुछ देर में निपटाकर आती है..
पता ही नही चलता कब दोपहर से शाम हो जाती है..
सास ससुर की चाय बनाकर फिर से चौके में जुट जाती है..
खाना पीना निपटाकर फिर बर्तनों पर जुट जाती है..
सबको सुलाकर सुबह उठने को फिर से वो सो जाती है..
हैरान हूं दोस्तों ये देखकर सौलह घंटे ड्यूटी बजाती है..
फिर भी एक पैसे की पगार नही पाती है..
ना जाने क्यूं दुनिया उस औरत का मजाक उडाती है..
ना जाने क्यूं दुनिया उस औरत पर चुटकुले बनाती है..
जो पत्नी मां बहन बेटी ना जाने कितने रिश्ते निभाती है..
सबके आंसू पोंछती है लेकिन खुद के आंसू छुपाती है..
नमन है मेरा घर की उस लक्ष्मी को जो घर को स्वर्ग बनाती है..
ड़ोली में बैठकर आती है और अर्थी पर लेटकर जाती है..

Surendra Rajput

Tuesday, 21 June 2016

प्राचीन स्वास्थ्य दोहावली

पानी में गुड डालिए,
बीत जाए जब रात!
सुबह छानकर पीजिए,
अच्छे हों हालात!!

धनिया की पत्ती मसल,
बूंद नैन में डार!
दुखती अँखियां ठीक हों,
पल लागे दो-चार!!

ऊर्जा मिलती है बहुत,
पिएं गुनगुना नीर!
कब्ज खतम हो पेट की,
मिट जाए हर पीर!!

प्रातः काल पानी पिएं,
घूंट-घूंट कर आप!
बस दो-तीन गिलास है,
हर औषधि का बाप!!

ठंडा पानी पियो मत,
करता क्रूर प्रहार!
करे हाजमे का सदा,
ये तो बंटाढार!!

भोजन करें धरती पर,
अल्थी पल्थी मार!
चबा-चबा कर खाइए,
वैद्य न झांकें द्वार!!

प्रातः काल फल रस लो,
दुपहर लस्सी-छांस!
सदा रात में दूध पी,
सभी रोग का नाश!!

दही उडद की दाल सँग,
पपीता दूध के संग!
जो खाएं इक साथ में,
जीवन हो बदरंग!!

प्रातः- दोपहर लीजिये,
जब नियमित आहार!
तीस मिनट की नींद लो,
रोग न आवें द्वार!!

भोजन करके रात में,
घूमें कदम हजार!
डाक्टर, ओझा, वैद्य का ,
लुट जाए व्यापार !!

देश, भेष, मौसम यथा,
हो जैसा परिवेश!
वैसा भोजन कीजिये,
कहते सखा सुरेश!!

इन बातों को मान कर,
जो करता उत्कर्ष!
जीवन में पग-पग मिले,
उस प्राणी को हर्ष!!

घूट-घूट पानी पियो,
रह तनाव से दूर!
एसिडिटी, या मोटापा,
होवें चकनाचूर!!

अर्थराइज या हार्निया,
अपेंडिक्स का त्रास!
पानी पीजै बैठकर,
कभी न आवें पास!!

रक्तचाप बढने लगे,
तब मत सोचो भाय!
सौगंध राम की खाइ के,
तुरत छोड दो चाय!!

सुबह खाइये कुवंर-सा,
दुपहर यथा नरेश!
भोजन लीजै रात में,
जैसे रंक सुरेश!!

देर रात तक जागना,
रोगों का जंजाल!
अपच,आंख के रोग सँग,
तन भी रहे निढाल!!

टूथपेस्ट-ब्रश छोडकर,
हर दिन दोनो जून!
दांत करें मजबूत यदि,
करिएगा दातून!!

हल्दी तुरत लगाइए,
अगर काट ले श्वान!
खतम करे ये जहर को,
कह गए कवि सुजान!!

मिश्री, गुड, खांड,
ये हैं गुण की खान!
पर सफेद शक्कर सखा,
समझो जहर समान!!

चुंबक का उपयोग कर,
ये है दवा सटीक!
हड्डी टूटी हो अगर,
अल्प समय में ठीक!!

दर्द,घाव,फोडा,चुभन,
सूजन,चोट पिराइ!
बीस मिनट चुंबक धरौ,
पिरवा जाइ हेराइ!!

हँसना, रोना, छींकना,
भूख, प्यास या प्यार!
क्रोध, जम्हाई रोकना,
समझो बंटाढार!!

सत्तर रोगों कोे करे,
चूना हमसे दूर!
दूर करे ये बाझपन,
सुस्ती अपच हुजूर!!

यदि सरसों के तेल में,
पग नाखून डुबाय!
खुजली, लाली, जलन सब,
नैनों से गुमि जाय!!

भोजन करके जोहिए,
केवल घंटा डेढ!
पानी इसके बाद पी,
ये औषधि का पेड!!

जो भोजन के साथ ही,
पीता रहता नीर!
रोग एक सौ तीन हों,
फुट जाए तकदीर!!

पानी करके गुनगुना,
मेथी देव भिगाय!
सुबह चबाकर नीर पी,
रक्तचाप सुधराय!!

अलसी, तिल, नारियल,
घी सरसों का तेल!
यही खाइए नहीं तो,
हार्ट समझिए फेल!!

पहला स्थान सेंधा नमक,
पहाड़ी नमक सु जान!
श्वेत नमक है सागरी,
ये है जहर समान!!

तेल वनस्पति खाइके,
चर्बी लियो बढाइ!
घेरा कोलेस्टरॉल तो,
आज रहे चिल्लाइ!!

अल्यूमिन के पात्र का,
करता है जो उपयोग!
आमंत्रित करता सदा ,
वह अडतालीस रोग!!

फल या मीठा खाइके,
तुरत न पीजै नीर!
ये सब छोटी आंत में,
बनते विषधर तीर!!

चोकर खाने से सदा,
बढती तन की शक्ति!
गेहूँ मोटा पीसिए,
दिल में बढे विरक्ति!!

नींबू पानी का सदा,
करता जो उपयोग!
पास नहीं आते कभी,
यकृति-आंत के रोग!!

दूषित पानी जो पिए,
बिगडे उसका पेट!
ऐसे जल को समझिए,
सौ रोगों का गेट!!

रोज मुलहठी चूसिए,
कफ बाहर आ जाय!
बने सुरीला कंठ भी,
सबको लगत सुहाय!!

भोजन करके खाइए,
सौंफ, गुड, अजवान!
पत्थर भी पच जायगा,
जानै सकल जहान!!

लौकी का रस पीजिए,
चोकर युक्त पिसान!
तुलसी, गुड, सेंधा नमक,
हृदय रोग निदान!!

हृदय रोग, खांसी और
आंव करें बदनाम!
दो अनार खाएं सदा,
बनते बिगडे काम!!

चैत्र माह में नीम की,
पत्ती हर दिन खावे !
ज्वर, डेंगू या मलेरिया,
बारह मील भगावे !!

सौ वर्षों तक वह जिए,
लेत नाक से सांस!
अल्पकाल जीवें,करें,
मुंह से श्वासोच्छ्वास!!

सितम,गर्म जल से कभी,
करिये मत स्नान!
घट जाता है आत्मबल,
नैनन को नुकसान!!

हृदय रोग से आपको,
बचना है श्रीमान!
सुरा, चाय या कोल्ड्रिंक,
का मत करिए पान!!

अगर नहावें गरम जल,
तन-मन हो कमजोर!
नयन ज्योति कमजोर हो,
शक्ति घटे चहुंओर!!

तुलसी का पत्ता करें,
यदि हरदम उपयोग!
मिट जाते हर उम्र में,
तन के सारे रोग!!

Wednesday, 16 December 2015

ऑनलाइन बनवाएं कलर वोटर आईडी कार्ड

अगर आप 18 साल से ऊपर है और वोटर आईडी कार्ड बनवाना चाहते हैं तो चुनाव आयोग के ऑफिस के महीनों चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अब आप अपने घर पर बैठकर स्मार्टफोन या लैपटॉप की मदद से कलर वोटर आईडी कार्ड के लिए अप्लाई कर सकते हैं। एक महीने के अंदर आपको अपना वोटर कार्ड मिल भी जाएगा।

हम आपको बताने जा रहा वो स्टेप्स जिनको फॉलो करके आप घर बैठे वोटर आईडी कार्ड बनवा सकते हैं।

स्टेप-1. पर्सनल ई-मेल आईडी होनी चाहिए
वोटर आई-डी कार्ड बनवाने से पहले आपके पास पर्सनल ई-मेल आई-डी और मोबाइल नंबर होना चाहिए, जिससे चुनाव आयोग को आपसे संपर्क करने में आसानी हो। कभी भी ऑफिस की मेल आई-डी आप ना दें। सबसे पहले आपको चुनाव आयोग की वेबसाइट www.eci-citizenservices.nic.in पर जाना होगा। यहां न्यू रजिस्ट्रेशन के ऑप्शन पर क्लिक करना होगा।

स्टेप-2. सावधानी से भरें फॉर्म में जानकारी
ऑप्शन पर क्लिक करने के बाद आपके सामने एक पेज खुलेगा जिस पर आप अपनी सभी जानकारी को सावधानीपूर्वक भरें। वोटर आईडी कार्ड बहुत ही महत्वपूर्ण होता है इसलिए कोई भी गलत जानकारी भरने से बचें। गलत जानकारी देने पर चुनाव आयोग आपको जेल भी भेज सकता है। इसमें आपको अपनी कलर पासपोर्ट साइज फोटो जो कि व्हाइट बैकग्राउंड में होनी चाहिए वो भी अपलोड करनी होगी।

स्टेप-3. जानकारी को कर सकते हैं चेंज
फॉर्म सेव करने के बाद आप इसको सबमिट करेंगे। सबमिट करने के 15 दिन तक आप अपनी डिटेल्स में चेंज कर सकते हैं। आप अपने वोटर आई-डी कार्ड एप्लिकेशन का स्टेटस भी ऑनलाइन चेक भी कर सकते हैं।


स्टेप-4. एक माह में मिलेगा वोटर आई-डी कार्ड
जानकारी देने के बाद चुनाव आयोग की तरफ से नियुक्त आपके एरिया का बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) आपके घर पर आएगा और जिन डॉक्युमेंट्स को आपने अपलोड किया है उनको चेक करेगा और इन डॉक्युमेंट्स की हार्ड कॉपी को वेरिफाई करने के लिए ले जाएगा। इसके बाद एक माह के अंदर पोस्ट द्वारा आपके घर पर वोटर आई-डी कार्ड पहुंच जाएगा।

स्टेप-5. इन डॉक्युमेंट्स की स्कैन कॉपी करनी होगी अपलोड
वोटर आई-डी कार्ड के लिए आपको एड्रेस प्रूफ और आई-डी प्रूफ में अलग-अलग डॉक्युमेंट्स की कॉपी अपलोड करनी पड़ेगी। इसके लिए आप पासपोर्ट, दसवीं की मार्कशीट, बर्थ सर्टिफिकेट, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, आधार कार्ड, बैंक की पासबुक, फोन/पानी/बिजली/गैस का बिल, इनकम टैक्स का फॉर्म 16 आदि में से किन्हीं दो डॉक्युमेंट्स की स्कैन कॉपी को अपलोड करना होगा।

500 रुपए में बनवाइए इंटरनेशनल DL, दुनिया में कहीं भी चला सकेंगे कार

अब आप इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस बनवा सकते हैं। जिसका सीधा-सा मतलब है कि उसे बनवाकर दुनिया के किसी भी कोने में कार, बाइक से लेकर पर्सनल यूज के लिए कोई भी गाड़ी चला सकते हैं। इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस बनावाना भी न केवल आसान है, बल्कि उसका खर्च भी बहुत कम आता है। आज हम आपको मात्र 500 रुपए में इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के तरीके बता रहा है। जिसके लिए आपको इन बातों का ध्यान रखना होगा...

क्यों जरूरी है इंटरनेशनल DL
इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस न केवल रेग्युलर विदेश यात्रा करने वालों के काम आता है, बल्कि जो कभी-कभार विदेश जाते हैं, उन्हें भी इसका फायदा मिलता है। इसके साथ ही जो लोग विदेश कंपनियों के तरफ काम के लिए कॉन्ट्रैक्ट पर जाते हैं, उनके लिए भी यह काफी लाभकरी होता है। यह किसी भी इमरजेंसी आपके लिए विदेश में काम आ सकता है। साथ ही, विदेश में घूमने का खर्च भी कम करता है।

कैसे करें अप्लाई
इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस को आप जैसे सामान्य लाइसेंस बनवाते हैं, उसी तरह बनवा सकते हैं। इसके लिए आप लोकल आरटीओ ऑफिस में जाकर अप्लाई कर सकते हैं।

चाहिए ये डॉक्युमेंट
इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए इन डॉक्युमेंट की जरूरत होती है। इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस बनवाते समय आपको इन डॉक्युमेंट्स के ऑरिजनल भी अपने साथ रखने होंगे।

  • फॉर्म 4A (इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस का एप्लिकेशन फॉर्म), ये ऑफिस और ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
  • वैलिड ड्राइविंग लाइसेंस की अटेस्टेड कॉपी
  • एड्रेस प्रूफ की अटेस्टेड कॉपी
  • वैलिड पासपोर्ट की अटेस्टेड कॉपी
  • वैलिड वीजा की अटेस्टेड कॉपी
  • एयर टिकट की कॉपी
  • पांच पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ
  • मेडिकल फॉर्म 1-A, ये ऑफिस और ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
  • भारतीय राष्ट्रीयता का प्रूफ
  • बर्थ सर्टिफिकेट की अटेस्टेड कॉपी


ये है फीस
इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए 500 रुपए फीस देनी होगी। ये आपको अपने एरिया के लोकल ट्रांसपोर्ट ऑफिस को कैश में जमा करानी होगी।

कितने समय के लिए होता है जारी
इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस एक साल के लिए जारी होता है। आपको एक साल के टाइम पीरियड में इसका इस्तेमाल करना होगा। नॉर्मल ड्राइविंग लाइसेंस अब पांच साल के लिए बनता है।

कौन बनवा सकता है लाइसेंस
आपके पास वैलिड ड्राइविंग लाइसेंस होना चाहिए।
आपके पास वैलिड पासपोर्ट होना चाहिए।

नहीं होता है रिन्युअल
इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यू नहीं होता। वैलिडिटी खत्म होने के बाद आपको फिर से इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अप्लाई करना होगा।


कब होता है जारी
इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस सुबह 8.30 बजे से दोपहर के 1:00 बजे तक जारी होता है।

कितने दिन में मिलता है इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस
इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस सात वर्किंग दिन से अधिकतम 30 दिन में जारी हो जाता है।

300 Kmph की रफ्तार से दौड़ेगी इंडिया की 1st बुलेट ट्रेन, ये होगा किराया!

भारत के लिए पहली बुलेट ट्रेन चलाने में जापान मदद करेगा। यह ट्रेन मुंबई और अहमदाबाद के बीच दौड़ेगी और 505 किलोमीटर की दूरी को सात घंटे के बदले दो घंटे में पूरा करेगी। इसके लिए भारत और जापान के बीच एमओयू साइन हुआ है। हम आपको इस ट्रेन के बारे में सारी जानकारी दे रहे हैं। यहां तक कि इस प्रोजेक्ट से जुड़ी रिपोर्ट के आधार पर बता रहे हैं कि इस ट्रेन का किराया कितना होगा?

ये है प्रोजेक्ट
हाईस्पीडः मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर
दूरीः 505 किलोमीटर
खर्च होंगेः 98,805 करोड़ रुपए
यात्रा का समयः 7 घंटे की बजाय 2 घंटे
प्रपोज्ड स्पीडः 300 किलोमीटर प्रति घंटा

दो साल पहले शुरू हुई थी स्टडी
इसके लिए जापान इंटरनेशनल कॉर्पोरेशन एजेंसी (जेआईसीए) और रेल मंत्रालय, भारत ने दो साल पहले ही हाईस्पीड रेल बनाने और चलाने को लेकर स्टडी शुरू की थी।

जुलाई में सौंपी गई रिपोर्ट
यह रिपोर्ट भारत को जुलाई 2015 में सौंपी गई। इस रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि जापान की बुलेट ट्रेनों में शामिल शिंकान्सेन की तर्ज पर भारत में ट्रेन चलाई जा सकती है।

ये होगा किराया
जेआईसीए के अध्ययन पर बीबीसी में छपी रिपोर्ट के मुताबिक इस ट्रेन का संभावित किराया करीब 2800 रुपए होगा। मुंबई-अहमदाबाद के बीच फिलहाल सबसे ज्यादा किराया मुंबई शताब्दी एक्सप्रेस फर्स्ट क्लास का है। फर्स्ट क्लास से सफर करने पर यात्रियों को 1920 रुपए भरने होते हैं।


इस रूट पर कुल 12 स्टेशन बनाए जाएंगे।

भारत 10 हजार किलोमीटर के हाई-स्पीड रूट प्लान कर रहा है।

इस प्रोजेक्ट के लिए जापान चाहता है कि भारत, कम से कम 30 फीसदी इक्विपमेंट जापान से खरीदे। जिनमें टोक्यो में निर्मित कोच भी शामिल हों।

इस काम के लिए जापान भारत को 1 फीसदी से भी कम की दर पर 50 साल के लिए लोन देगा।

जापान इस प्रोजेक्ट में भारत की 81 फीसदी कॉस्ट का वहन करेगा।

इस प्रोजेक्ट की शुरुआत 2017 में होगी और 2023 तक इसके कम्पलीट होने की उम्मीद है।

इस प्रोजेक्ट की सफलता के बाद इस लाइन को नई दिल्ली तक बढ़ाया जाएगा।

जापान के बिजनेस डेली निक्की के मुताबिक साल 2023 तक 40 हजार यात्री इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।

इतने बनेंगे पुल और टनल
इस रूट पर 11 टनल बनाए जा सकते हैं। जिनमें से एक मुंबई में समुद्र के भीतर होगा। इसके अलावा मुंबई-अहमदाबाद रूट में 318 किलोमीटर के बांध, 162 किमी पुल और 27.01 किलोमीटर की 11 सुरंगें बनाना भी शामिल होगा। इस लाइन में कुल 12 स्टेशन होंगे जिनमें सूरत और वड़ोदरा में दो-दो मिनट का ठहराव होगा।


जापान ने बनाई थी विशेष लाइन, 1964 में शुरू हुई पहली लाइन
दुनिया में जापान पहला देश है, जिसने हाईस्पीड ट्रेनों के लिए विशेष रेलवे लाइन शिन्कान्सेन बनाई। शिंकान्सेन का मतलब है, नई ट्रंक लाइनें। जापान में पहली 515 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन 1964 में टोक्यो और शिन ओसाका के बीच शुरू हुई थी। यह ट्रेन 285 किमी/घंटा की रफ्तार से टोक्यो और शिन ओसाका की दूरी तय करने में 2 घंटे 22 मिनट का वक्त लेती है।

जापान की टेक्नोलॉजी लेने वाले दूसरा देश हो सकता है भारत
जापान यह टेक्नोलॉजी कई देशों को ऑफर कर रहा है। हाल ही जापान ने अपनी बुलेट ट्रेन से जुड़ी  टेक्नोलॉजी ताईवान को बेची है। अगर भारत इसे लेने का फैसला करता है तो वह ऐसा दूसरा देश हो जाएगा।

Sunday, 16 August 2015

आज़ादी

बेबस हूँ, बिखरी हूँ, उलझी हूँ सत्ता के जालो में,
एक दिवस को छोड़ बरस भर बंद रही हूँ तालों में,
बस केवल पंद्रह अगस्त को मुस्काने की आदी हूँ,
लालकिले से चीख रही मैं भारत की आज़ादी हूँ,
जन्म हुआ सन सैतालिस में,बचपन मेरा बाँट दिया,
मेरे ही अपनों ने मेरा दायाँ बाजू काट दिया,
जब मेरे पोषण के दिन थे तब मुझको कंगाल किया
मस्तक पर तलवार चला दी,और अलग बंगाल किया
मुझको जीवनदान दिया था लाल बहादुर नाहर ने,
वर्ना मुझको मार दिया था जिन्ना और जवाहर ने,
मैंने अपना यौवन काटा था काँटों की सेजों पर,
और बहुत नीलाम हुयी हूँ ताशकंद की मेजों पर,
नरम सुपाड़ी बनी रही मैं,कटती रही सरौतों से,
मेरी अस्मत बहुत लुटी है उन शिमला समझौतों से,
मुझको सौ सौ बार डसा है,कायर दहशतगर्दी ने,
सदा झुकायीं मेरी नज़रे,दिल्ली की नामर्दी ने,
मेरा नाता टूट चूका है,पायल कंगन रोली से,
छलनी पड़ा हुआ है सीना नक्सलियों की गोली से,
तीन रंग की मेरी चूनर रोज़ जलायी जाती है,
मुझको नंगा करके मुझमे आग लगाई जाती है
मेरी चमड़ी तक बेची है मेरे राजदुलारों ने,
मुझको ही अँधा कर डाला मेरे श्रवण कुमारों ने
उजड़ चुकी हूँ बिना रंग के फगवा जैसी दिखती हूँ,
भारत तो ज़िंदा है पर मैं विधवा जैसी दिखती हूँ,
मेरे सारे ज़ख्मों पर ये नमक लगाने आये हैं,
लालकिले पर एक दिवस का जश्न मनाने आये हैं
बूढ़े बालों को ये काली चोटी देने आये हैं,
एक साल के बाद मुझे ये रोटी देने आये हैं,
जो मुझसे हो लूट चुके वो पाई पाई कब दोगे,
मैं कब से बीमार पड़ी हूँ मुझे दवाई कब दोगे,
सत्य न्याय ईमान धरम का पहले उचित प्रबंध करो,
तब तक ऐसे लालकिले का नाटक बिलकुल बंद करो,

जय हिन्द! जय भारत!
डाॅ0 अवधेश,  पन्तनगर

Wednesday, 15 July 2015

सच्चे संघर्ष की कहानी


कहा जाता है कि अगर इंसान में संघर्ष और कठिन मेहनत करने की क्षमता हो तो दुनिया में ऐसा कोई मुकाम नहीं है जिसे हासिल ना किया जा सके। कवि रामधारी सिंह दिनकर ने सही ही कहा है कि "मानव जब जोर लगाता है, पत्थर पानी बन जाता है।" ये कथन कानपुर के रहने वाले अभिषेक पे बिल्कुल सही बैठता है। सोना तपकर ही कुंदन बनता है और इतिहास गवाह है कि जिन लोगों ने अपना जीवन अभावों में गुजारा है वही लोग आगे चलकर सफलता को हासिल करते हैं।

कोई भी माँ-बाप कितने भी गरीब क्यों न हों पर हर माँ-बाप का एक सपना होता है कि उनका बच्चा खूब पढ़ाई करे और जीवन में सफल होकर उनका नाम रोशन करे। ऐसी ही एक बहुत गरीब परिवार की कहानी है जो दिल को छूते हुए गहरे सन्देश छोड़ती है।

कानपुर के रहने वाले अभिषेक कुमार भारती ने 2010 में भारत के सबसे कठिन इंजीनियरिंग परीक्षा IIT -JEE को पास किया जो अपने आप में एक अद्भुत उपलब्धि है। अभिषेक के पिता राजेन्द्र प्रसाद एक जूता सिलने वाले मोची हैं, ये सुनने में जरूर अजीब लगेगा लेकिन सत्य है और माँ घर में लोगों के फटे कपड़े सिलकर कुछ पैसे इकट्ठे करती हैं। परिवार की रोज की दैनिक आमदनी मुश्किल से 150 रुपये है जिसमें परिवार का खर्चा चलना बहुत ही मुश्किल है। और घर के नाम पर एक छोटा सा कमरा है।

कई बार अभिषेक खुद पिता की अनुपस्थिति में जूतों की सिलाई करता था। कभी कुछ पैसे कमाने के लिए नगरपालिका के कर्मचारियों के साथ काम भी करता था । लेकिन पढ़ने की चाह अभिषेक में शुरू से ही थी। वो रात भर जागकर पढाई करता। घर में बिजली कनेक्शन नहीं था तो लालटेन जला कर ही रात को पढाई करनी पढ़ती थी। अच्छी पढाई के लिए ना कोचिंग के पैसे थे और ना ही किताबें खरीदने के फिर भी अभिषेक जी जान से लगा रहता था। वो कभी हार ना मानने वाले लोगों में से था, अपने दोस्तों से पुरानी किताबें लेकर पढाई किया करता था। उसकी लगन के आगे आखिर किस्मत को झुकना ही पड़ा और अभिषेक ने वो उपलब्धि हासिल की जिसका लाखों भारतीय छात्र सपना देखते हैं। आज अभिषेक IIT Kanpur में AEROSPACE Engineering की पढाई कर रहे हैं।

तो मित्रों, सफलता कोई एक रात का खेल नहीं है जो पलक झपकते किस्मत बदल जाएगी, आपको कठिन मेहनत करनी होगी खुद को संघर्ष रूपी आग में तपाना होगा, फिर देखिये दुनिया आपके कदमों में झुक जाएगी।

यदि आपके पास स्वलिखित कोई अच्छे लेख, कविता, News, Inspirational Story, या अन्य जानकारी लोगों से शेयर करना चाहते है तो आप हमें "info@sochapki.com" पर ईमेल कर सकते हैं। अगर आपका लेख हमें अच्छा लगा तो हम उसे आपकी दी हुई details के साथ Publish करेंगे। धन्यवाद!

Friday, 10 July 2015

गुडकारी तुलसी बचाये विभिन्न समस्याओं से!

क्या आपने कभी इस बात पर ध्यान दिया कि आप पर या आपके घर, परिवार पर कोई मुसीबत आने वाली होती है तो उसका असर सबसे पहले आपके घर में स्थित तुलसी के पौधे पर होता है। आप उस पौधे का कितना भी ध्यान रखें धीरे-धीरे वो पौधा सूखने लगता है।

पुराणों और शास्त्रों के अनुसार ऐसा इसलिए होता है कि जिस घर पर मुसीबत आने वाली होती है उस घर से सबसे पहले लक्ष्मी यानी तुलसी चली जाती है। क्योंकि दरिद्रता, अशांति या क्लेश जहां होता है वहां लक्ष्मी जी का निवास नहीं होता।

अगर ज्योतिष की मानें तो ऐसा बुध के कारण होता है। बुध का प्रभाव हरे रंग पर होता है और बुध को पेड़ पौधों का कारक ग्रह माना जाता है। बुध ऐसा ग्रह है जो अन्य ग्रहों के अच्छे और बुरे प्रभाव जातक तक पहुंचाता है। अगर कोई ग्रह अशुभ फल देगा तो उसका अशुभ प्रभाव बुध के कारक वस्तुओं पर भी होता है। अगर कोई ग्रह शुभ फल देता है तो उसके शुभ प्रभाव से तुलसी का पौधा बढ़ता रहता है।

घर में तुलसी के पौधे की उपस्थिति एक वैद्य के समान है। शायद आपने इस बात पर ध्यान ना दिया हो लेकिन मामूली सी दिखने वाली यह तुलसी हमारे घर के समस्त दोष को दूर कर हमारे जीवन को निरोग और सुखमय बनाने में सक्षम है।

तुलसी का गमला रसोई के पास रखने से पारिवारिक कलह समाप्त होता है। पूर्व दिशा की खिड़की के पास तुलसी का पौधा रखने से पुत्र यदि जिद्दी हो तो उसका हठ दूर होता है।

कन्या के विवाह में विलम्ब हो रहा हो तो अग्नि कोण में तुलसी के पौधे को कन्या नित्य जल अर्पण कर एक प्रदक्षिणा करे तो विवाह जल्दी होता है और बाधाएं दूर होती हैं।

यदि कारोबार ठीक नहीं चल रहा तो दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखे तुलसी के पौधे में हर शुक्रवार कच्चा दूध अर्पण करें और किसी सुहागिन स्त्री को मीठी वस्तु दें। इससे व्यवसाय में सफलता मिलती है।

नौकरी में यदि उच्चाधिकारी की वजह से परेशानी हो तो ऑफिस में खाली जमीन या किसी गमले में सोमवार को तुलसी के 16 बीज किसी सफेद कपड़े में बांधकर दबा दें, मान-सम्मान में वृद्धि होगी।

Monday, 8 June 2015

स्वर्ग यहीं है

लोहे की एक छड़ का मूल्य होता है 250 रूपये। इससे घोड़े की नाल बना दी जाये तो इसका मूल्य हो जाता है 1000 रूपये। इससे सुईयां बना दी जायें तो इसका मूल्य हो जाता है 10,000 रूपये। इससे घड़ियों के बैलेंस स्प्रिंग बना दिए जायें तो इसका मूल्य हो जाता है 1,00,000 रूपये...

आपका अपना मूल्य इससे निर्धारित नहीं होता कि आप क्या है बल्कि इससे निर्धारित होता है कि आप में खुद को क्या बनाने की क्षमता है!!!! इतने छोटे बनिए कि हर कोई आपके साथ बैठे, ..ओर इतने बड़े बनिए कि आप खड़े हो तो कोई बैठा न रहे..!! कभी-कभी आप अपनी जिंदगी से निराश हो जाते हैं, जबकि दुनिया में उसी समय कुछ लोग आपकी जैसी जिंदगी जीने का सपना देख रहे होते हैं।

घर पर खेत में खड़ा बच्चा आकाश में उड़ते हवाई जहाज को देखकर उड़ने का सपना देख रहा होता है, परंतु उसी समय उसी हवाई जहाज का पायलट खेत ओर बच्चे को देख घर लौटने का सपना देख रहा होता है। यही जिंदगी है। जो तुम्हारे पास है उसका मजा लो। अगर धन-दौलत रूपया पैसा ही खुशहाल होने का सीक्रेट होता, तो अमीर लोग नाचते दिखाई पड़ते, लेकिन सिर्फ गरीब बच्चे ऐसा करते दिखाई देते हैं। अगर पाॅवर (शक्ति) मिलने से सुरक्षा आ जाती तो नेता अधिकारी बिना सिक्युरिटी के नजर आते। परन्तु जो सामान्य जीवन जीते हैं, वे चैन की नींद सोते हैं।

अगर खुबसुरती और प्रसिद्धि मजबूत रिश्ते कायम कर सकती तो सेलीब्रिटीज् की शादियाँ सबसे सफल होती। जबकि इनके तलाक सबसे सफल होते हैं। इसलिए दोस्तों, यह जिंदगी ......सभी के लिए खुबसुरत है इसको जी भरकर जीयों, इसका भरपूर लुत्फ़ उठाओ क्योंकि जिदंगी ना मिलेगी दोबारा... सामान्य जीवन जियें... विनम्रता से चलें ...और ईमानदारी पूर्वक प्यार करें... स्वर्ग यहीं हैं...

Saturday, 16 May 2015

12 और 330 रुपए में इंश्योरेंस योजना 9 मई को होगी लांच

नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय ने 12 और 330 रुपए में सस्ता इंश्योरेंस देने के नियम तय कर दिए हैं। इसके तहत बीमा का लाभ लेने के लिए आवेदक का बचत खाता होना जरूरी होगा। साथ ही वह केवल एक बैंक खाते पर ही सस्ते इंश्योरेंस का लाभ ले पाएगा। यानी अगर किसी व्यक्ति का एक से ज्यादा बैंक खाता है, तो वह दो या दो से अधिक खाते पर स्कीम का लाभ नहीं ले पाएगा। उसे केवल एक खाते पर ही 12 रुपए में दुर्घटना बीमा और 330 रुपए में जीवन बीमा कराने का मौका मिलेगा।

▪एक जून से मिलेगा कवर

प्रधानमंत्री जीवन सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना की शुरुआत 1 जून 2015 से शुरू हो रही है। जिसके लिए 31 मई तक रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है। देश के प्रमुख बैंक स्कीम में इनरोलेमेंट की सुविधा 1 मई से शुरू करेंगे। इनमें प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई), प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई) और अटल पेंशन योजना (एपीवाई) शामिल हैं। तीनों योजनाओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  9 मई को कोलकाता से लांच करेंगे। अटल पेंशन योजना के तहत न्यूनतम 1000 रुपए मासिक  पेंशन मिलेगा। यह योजना 18 से 40 वर्ष के व्यक्तियों के लिए है। शुरुआती पांच वर्षों तक सरकार 1000 रुपए या सब्सक्राइबर के अंशदान का 50 फीसदी सालाना का योगदान खाते में करेगी।

▪मल्टीपल बैंक खाता होने पर भी एक ही इंश्योरेंस

वित्त मंत्रालय द्वारा जारी सूचना के अनुसार अगर किसी खाताधारक का एक से अधिक बैंक में बचत खाता है, तो भी वह केवल एक ही बार इंश्योरेंस करा सकेगा। ऐसा नहीं होगा कि कोई व्यक्ति अलग-अलग बैंक में कई बार इंश्योरेंस का लाभ ले सके। वित्त मंत्रालय की कोशिश है कि स्कीम का लाभ देश का हर व्यक्ति ले सके।

▪"आधार" होगा अहम

इंश्योरेंस कवर देने में डुप्लीकेसी न हो इसलिए स्कीम के तहत केवाईसी में आधार को अहम रखा गया है। नियमों के मुताबिक जो भी व्यकित स्कीम के लिए आवेदन करेगा। उसके केवाईसी के रूप में बैंक “आधार” को प्रमुखता देंगे।

▪पहले साल इनरोलमेंट में मिलेगी छूट

दोनों योजनाओं की अवधि 1 जून 2015 से लागू होगी। जो कि हर साल 1 जून से लेकर 31 मई तक के लिए होगी। उसके बाद योजना में बने रहने के लिए हर साल बीमाधारक को रिन्यूअल कराना होगा। इस साल 31 अगस्त 2015 तक इनरोलमेंट की छूट वित्त मंत्रालय ने दी। जिसे जरूरत पड़ने पर बढ़ाया भी जा सकता है।

▪कैसे कराए इनरोलमेंट

जिस बैंक में आपका बचत खाता है, वहां जाकर आप इनरोलमेंट के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके तहत बैंक आपको एक फार्म देगा। जिसके जरिए आपका बीमा किया जाएगा। प्रीमियम के लिए आपको बैंक फार्म में यह स्वीकृति देनी होगी, कि आपके खाते से प्रीमियम की राशि खुद ही काट ली जाए। बैंक हर साल आपके खाते से प्रीमियम की राशि खुद ही काट लेंगे। साथ ही यह भी जरूरी है कि आप बैंक के नियम के मुताबिक हमेशा बचत खाते में न्यूनतम राशि रखे रहें। बीमा के लिए आपको किसी बीमा कंपनी के पास आवेदन की जरूरत नहीं होगी।

▪कितना  मिलेगा कवर

प्रधानमंत्री जीवन सुरक्षा बीमा योजना में बीमा धारक को 2 लाख रुपए का दुर्घटना कवर मिलेगा। जबकि दुर्घटना के दौरान विकलांगता आदि की स्थिति में 1 लाख रुपए का कवर मिलेगा। हालांकि अगर दुर्घटना के दौरान व्यक्ति की दोनों आंखों की रोशनी चली जाती है, या फिर उसके हाथ और पैर बेकार हो जाते हैं, तो भी 2 लाख रुपए का कवर बीमाधारक को मिलेगा। कोई भी व्यक्ति जिसका बचत खाता है और उसकी उम्र 18-70 साल तक है, वह स्कीम का लाभ ले सकेगा। इसके लिए उसे हर साल 12 रुपए का प्रीमियम देना होगा।

इसी तरह जीवन ज्योति योजना के तहत 18-50 साल की उम्र का व्यक्ति 330 रुपए का सालाना प्रीमियम देकर, 2 लाख रुपए का जीवन बीमा कवर ले सकेगा। 55 साल की अवधि के दौरान अगर किसी व्यक्ति की किसी भी कारण मौत होती है, तो उसके उत्तराधिकारी को 2 लाख रुपए की राशि मिलेगी।।

कृपया इस सन्देश को प्रसारित करे जिससे इस बेहतरीन योजना का लाभ जन जन को मिल सके।

बेटियाँ

Why married daughters come to visit their parents Very nice must read:

"बेटियाँ कुछ लेने नहीं आती है पीहर"

..बेटियाँ..
..पीहर आती है अपनी जड़ों को सींचने के लिए।
..तलाशने आती हैं भाई की खुशियाँ।
..वे ढूँढने आती हैं अपना सलोना बचपन।
..वे रखने आतीं हैं आँगन में स्नेह का दीपक।
..बेटियाँ कुछ लेने नहीं आती हैं पीहर॥

..बेटियाँ..
..ताबीज बांधने आती हैं दरवाजे पर कि नज़र से बचा रहे घर।
..वे नहाने आती हैं ममता की निर्झरनी में।
..देने आती हैं अपने भीतर से थोड़ा-थोड़ा सबको।
..बेटियाँ कुछ लेने नहीं आती हैं पीहर॥

..बेटियाँ..
..जब भी लौटती हैं ससुराल बहुत सारा वहीं छोड़ जाती हैं।
..तैरती रह जाती हैं घर भर की नम आँखों में उनकी प्यारी मुस्कान।
..जब भी आती हैं वे, लुटाने ही आती हैं अपना वैभव।
..बेटियाँ कुछ लेने नहीं आती हैं पीहर॥

बहुत "चंचल" बहुत "खुशनुमा " सी होती है "बेटियाँ"।
"नाज़ुक" सा "दिल" रखती है "मासूम" सी होती है "बेटियाँ"।
"बात" बात पर रोती है, "नादान" सी होती है "बेटियाँ"।
"रेहमत" से "भरपूर", "खुदा" की "नेमत" हैं "बेटियाँ"।
"घर" महक उठता है, जब "मुस्कराती" हैं "बेटियाँ"।
"अजीब" सी "तकलीफ" होती है, जब "दूसरे" घर जाती है "बेटियां"।
"घर" लगता है सूना-सूना "कितना" रुला के "जाती" है "बेटियां"।
"ख़ुशी" की "झलक", "बाबुल" की "लाड़ली" होती है "बेटियां"।
ये "हम" नहीं "कहते", यह तो "रब " कहता है.....
कि जब मैं बहुत खुश होता हूँ तो "जनम" लेती हैं "प्यारी सी बेटियां"॥

Friday, 15 May 2015

महाराणा प्रताप

नाम - कुँवर प्रताप जी (श्री महाराणा प्रताप सिंह जी)
जन्म - 9 मई, 1540 ई.
जन्म भूमि - कुम्भलगढ़, राजस्थान
पुण्य तिथि - 29 जनवरी, 1597 ई.
पिता - श्री महाराणा उदयसिंह जी
माता - राणी जीवत कँवर जी
राज्य - मेवाड़
शासन काल - 1568–1597ई.
शासन अवधि - 29 वर्ष
वंश - सुर्यवंश
राजवंश - सिसोदिया
राजघराना - राजपूताना
धार्मिक मान्यता - हिंदू धर्म
युद्ध - हल्दीघाटी का युद्ध
राजधानी - उदयपुर
पूर्वाधिकारी - महाराणा उदयसिंह
उत्तराधिकारी - राणा अमर सिंह
अन्य जानकारी -
महाराणा प्रताप सिंह जी के पास एक सबसे प्रिय घोड़ा था, जिसका नाम 'चेतक' था। राजपूत शिरोमणि महाराणा प्रताप सिंह उदयपुर, मेवाड़ में सिसोदिया राजवंश के राजा थे। वह तिथि धन्य है, जब मेवाड़ की शौर्य-भूमि पर मेवाड़-मुकुटमणि राणा प्रताप का जन्म हुआ। महाराणा का नाम इतिहास में वीरता और दृढ़ प्रण के लिये अमर है। महाराणा प्रताप की जयंती विक्रमी सम्वत् कॅलण्डर के अनुसार प्रतिवर्ष ज्येष्ठ, शुक्ल पक्ष तृतीया को मनाई जाती है। महाराणा प्रताप के बारे में कुछ रोचक जानकारी:-

1. महाराणा प्रताप एक ही झटके में घोड़े समेत दुश्मन सैनिक को काट डालते थे।
2. जब इब्राहिम लिंकन भारत दौरे पर आ रहे थे तब उन्होने अपनी माँ से पूछा कि हिंदुस्तान से आपके लिए क्या लेकर आए। तब माँ का जवाब मिला- ”उस महान देश की वीर भूमि हल्दी घाटी से एक मुट्ठी धूल लेकर आना जहाँ का राजा अपनी प्रजा के प्रति इतना वफ़ादार था कि उसने आधे हिंदुस्तान के बदले अपनी मातृभूमि को चुना ” लेकिन बदकिस्मती से उनका वो दौरा रद्द हो गया था। “बुक ऑफ़ प्रेसिडेंट यु एस ए ‘किताब में आप यह बात पढ़ सकते हैं।
3. महाराणा प्रताप के भाले का वजन 80 किलोग्राम था और कवच का वजन भी 80 किलोग्राम ही था। कवच, भाला, ढाल, और हाथ में तलवार का वजन मिलाएं तो कुल वजन 207 किलो था।
4. आज भी महाराणा प्रताप की तलवार कवच आदि सामान उदयपुर राज घराने के संग्रहालय में सुरक्षित हैं।
5. अकबर ने कहा था कि अगर राणा प्रताप मेरे सामने झुकते है तो आधा हिंदुस्तान के वारिस वो होंगे पर बादशाहत अकबर की ही रहेगी। लेकिन महाराणा प्रताप ने किसी की भी अधीनता स्वीकार करने से मना कर दिया।
6. हल्दी घाटी की लड़ाई में मेवाड़ से 20000 सैनिक थे और अकबर की ओर से 85000 सैनिक युद्ध में सम्मिलित हुए।
7. महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक का मंदिर भी बना हुआ है जो आज भी हल्दी घाटी में सुरक्षित है।
8. महाराणा प्रताप ने जब महलों का त्याग किया तब उनके साथ लुहार जाति के हजारो लोगों ने भी घर छोड़ा और दिन रात राणा कि फौज के लिए तलवारें बनाईं। इसी समाज को आज गुजरात, मध्यप्रदेश और राजस्थान में गाढ़िया लोहार कहा जाता है। मैं नमन करता हूँ ऐसे लोगो को।
9. हल्दी घाटी के युद्ध के 300 साल बाद भी वहाँ जमीनों में तलवारें पाई गई। आखिरी बार तलवारों का जखीरा 1985 में हल्दी घाटी में मिला था।
10. महाराणा प्रताप को शस्त्रास्त्र की शिक्षा "श्री जैमल मेड़तिया जी" ने दी थी जो 8000 राजपूत वीरों को लेकर 60000 मुसलमानों से लड़े थे। उस युद्ध में 48000 मारे गए थे जिनमे 8000 राजपूत और 40000 मुग़ल थे।
11. महाराणा के देहांत पर अकबर भी रो पड़ा था।
12. मेवाड़ के आदिवासी भील समाज ने हल्दी घाटी में अकबर की फौज को अपने तीरो से रौंद डाला था वो महाराणा प्रताप को अपना बेटा मानते थे और राणा बिना भेदभाव के उन के साथ रहते थे। आज भी मेवाड़ के राजचिन्ह पर एक तरफ राजपूत हैं तो दूसरी तरफ भील।
13. महाराणा प्रताप का घोड़ा चेतक महाराणा को 26 फीट का दरिया पार करने के बाद वीर गति को प्राप्त हुआ। उसकी एक टांग टूटने के बाद भी वह दरिया पार कर गया। जहाँ वो घायल हुआ वहां आज खोड़ी इमली नाम का पेड़ है जहाँ पर चेतक की मृत्यु हुई वहाँ चेतक मंदिर है।
14. राणा का घोड़ा चेतक भी बहुत ताकतवर था उसके मुँह के आगे दुश्मन के हाथियों को भ्रमित करने के लिए हाथी की सूंड लगाई जाती थी। यह हेतक और चेतक नाम के दो घोड़े थे।
15. मरने से पहले महाराणा प्रताप ने अपना खोया हुआ 85 % मेवाड फिर से जीत लिया था। सोने चांदी और
महलो को छोड़कर वो 20 साल मेवाड़ के जंगलो में घूमे।
16. महाराणा प्रताप का वजन 110 किलो और लम्बाई 7’5” थी, दो म्यान वाली तलवार और 80 किलो का भाला रखते थे हाथ में।

महाराणा प्रताप के हाथी की कहानी:-
मित्रो आप सब ने महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक के बारे में तो सुना ही होगा, लेकिन उनका एक हाथी भी था। जिसका नाम था रामप्रसाद। उसके बारे में आपको कुछ बाते बताता हुँ। रामप्रसाद हाथी का उल्लेख अल- बदायुनी, जो मुगलों की ओर से हल्दीघाटी के युद्ध में लड़ा था ने अपने एक ग्रन्थ में किया है। वो लिखता है की जब महाराणा प्रताप पर अकबर ने चढाई की थी तब उसने दो चीजो को ही बंदी बनाने की मांग की थी एक तो खुद महाराणा और दूसरा उनका हाथी रामप्रसाद।

आगे अल बदायुनी लिखता है की वो हाथी इतना समझदार व ताकतवर था की उसने हल्दीघाटी के युद्ध में अकेले ही अकबर के 13 हाथियों को मार गिराया था। वो आगे लिखता है कि उस हाथी को पकड़ने के लिए हमने 7 बड़े हाथियों का एक चक्रव्यूह बनाया और उन पर 14 महावतो को बिठाया तब कहीं जाकर उसे बंदी बना पाये। अब सुनिए एक भारतीय जानवर की स्वामी भक्ति। उस हाथी को अकबर के समक्ष पेश किया गया जहा अकबर ने उसका नाम पीरप्रसाद रखा। रामप्रसाद को मुगलों ने गन्ने और पानी दिया। पर उस स्वामिभक्त हाथी ने 18 दिन तक मुगलों का न तो दाना खाया और न ही पानी पिया और वो शहीद हो गया।

तब अकबर ने कहा था कि जिसके हाथी को मैं अपने सामने नहीं झुका पाया उस महाराणा प्रताप को क्या झुका पाउँगा। ऐसे ऐसे देशभक्त चेतक व रामप्रसाद जैसे तो यहाँ जानवर थे। इसलिए मित्रो हमेशा अपने भारतीय होने पे गर्व करो।

Sunday, 3 May 2015

विलक्षण

भारतीय इतिहास का, कीजे अनुसंधान
देव-दनुज-किन्नर सभी, किया सोमरस पान
किया सोमरस पान, पियें कवि, लेखक, शायर
जो इससे बच जाये, उसे कहते हैं 'कायर'
कहँ 'काका', कवि 'बच्चन' ने पीकर दो प्याला
दो घंटे में लिख डाली, पूरी 'मधुशाला'।

भेदभाव से मुक्त यह, क्या ऊँचा क्या नीच
अहिरावण पीता इसे, पीता था मारीच
पीता था मारीच, स्वर्ण- मृग रूप बनाया
पीकर के रावण सीता जी को हर लाया
कहँ 'काका' कविराय, सुरा की करो न निंदा
मधु पीकर के मेघनाद पहुँचा किष्किंधा। 

ठेला हो या जीप हो, अथवा मोटरकार
ठर्रा पीकर छोड़ दो, अस्सी की रफ़्तार
अस्सी की रफ़्तार, नशे में पुण्य कमाओ
जो आगे आ जाये, स्वर्ग उसको पहुँचाओ
पकड़ें यदि सार्जेंट, सिपाही ड्यूटी वाले
लुढ़का दो उनके भी मुँह में, दो चार पियाले। 

पूरी बोतल गटकिये, होय ब्रह्म का ज्ञान
नाली की बू, इत्र की खुशबू एक समान
खुशबू एक समान, लड़्खड़ाती जब जिह्वा
'डिब्बा' कहना चाहें, निकले मुँह से 'दिब्बा'
कहँ 'काका' कविराय, अर्ध-उन्मीलित अँखियाँ
मुँह से बहती लार, भिनभिनाती हैं मखियाँ। 

प्रेम-वासना रोग में, सुरा रहे अनुकूल
सैंडिल-चप्पल-जूतियां, लगतीं जैसे फूल
लगतीं जैसे फूल, धूल झड़ जाये सिर की
बुद्धि शुद्ध हो जाये, खुले अक्कल की खिड़की
प्रजातंत्र में बिता रहे क्यों जीवन फ़ीका
बनो 'पियक्कड़चंद', स्वाद लो आज़ादी का।

एक बार मद्रास में देखा जोश-ख़रोश
बीस पियक्कड़ मर गये, तीस हुये बेहोश
तीस हुये बेहोश, दवा दी जाने कैसी
वे भी सब मर गये, दवाई हो तो ऐसी
चीफ़ सिविल सर्जन ने केस कर दिया डिसमिस
पोस्ट मार्टम हुआ, पेट में निकली 'वार्निश'।